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एक बूढ़ा विकर, जिसका नाम था , उस गाँव पहुँचा। उसने लेशी को तो मार दिया, लेकिन उसकी नज़र उस नौकर लड़के पर पड़ी। डिगेरा ने देखा कि वेसेमिर डरता नहीं, बल्कि राक्षस के खून को देखकर सीखने की कोशिश कर रहा था।

वेसेमिर ने धीरे से कहा – "हाँ। और शायद यही सबसे बड़ा दुःस्वप्न है... या सबसे बड़ी ताकत। तू क्या बनना चाहेगा?"

रास्ते में एक छोटा बच्चा मिला – भूखा, डरा हुआ, गाँव से भगाया हुआ।

"बच्चे," डिगेरा बोला, "तेरे अंदर कोई चीज़ है। लेकिन विकर बनने का मतलब है... इंसानियत को अलविदा कहना।"

लेकिन असली कहर तब शुरू हुआ जब उस गाँव में एक लेशी ने आतंक मचा दिया। एक ही रात में, आधा गाँव सोते-सोते मर गया। बाकी बचे लोगों ने चिल्लाकर कहा, "कहीं कोई विकर आए!"

बच्चे ने कहा – "जो राक्षसों से लड़े।"

अंत में, वह अकेला खड़ा था – खून से सना, थका हुआ, लेकिन टूटा नहीं। उसने अपने कंधे पर भेड़िये की खाल डाली और काएड मोरहेन की ओर चल दिया।

और फिर शुरू हुआ उसका कठोर प्रशिक्षण। काएड मोरहेन के ठंडे गलियारों में, बर्फीली रातों में, जहाँ छोटे बच्चों को (Trial of the Grasses) से गुजरना पड़ता था। उस रात वेसेमिर की चीखें पूरे पहाड़ पर सुनाई दीं। उसकी आँखों से खून बहा, उसके दाँत बदले, उसके शरीर में ज़हर उतरा – लेकिन वह बच गया।