Tohfa Tul Awam In Hindi Online

अगर आप उर्दू-हिंदी के पुराने साहित्य, तसव्वुफ़ (सूफीवाद) या इस्लामिक आध्यात्मिकता की किताबों को पढ़ते रहे हैं, तो आपने का नाम जरूर सुना होगा। लेकिन यह किताब क्या है? इसे किसने लिखा? और क्यों आज भी इसे उतनी ही शिद्दत से पढ़ा जाता है जितनी सदियों पहले पढ़ा जाता था?

आइए, इस ब्लॉग पोस्ट में हम इसी रहस्यमयी और मार्मिक किताब की सैर करते हैं। तोहफ़ा-तुल-अवाम शब्दों का अर्थ है "आम लोगों के लिए उपहार" । tohfa tul awam in hindi

अगर आप रात को सोने से पहले कुछ ऐसा पढ़ना चाहते हैं जो आपकी आँखों में आंसू ला दे और दिल को सुकून दे – तो यह किताब आपके लिए ही लिखी गई थी, 300 साल पहले। tohfa tul awam in hindi

धन्यवाद। (इस ब्लॉग को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो सूफी साहित्य या हिंदी-उर्दू अदब से प्यार करते हैं।) tohfa tul awam in hindi

उन्होंने देखा कि आम लोग (अवाम) फ़ारसी और अरबी की गहरी किताबें नहीं समझ सकते। उनकी जुबान सिंधी, हिंदी और उर्दू का मिला-जुला रूप थी। इसलिए उन्होंने किताब का अंदाज़ (Style) क्या है? यह किताब मसनवी (दोहों/शेरों की लंबी कविता) के रूप में लिखी गई है। लेकिन यह इतनी सहज और रवाँ (बहती हुई) है कि पढ़ते वक्त आपको लगेगा जैसे कोई अपने माशूक (प्रियतम – यानी अल्लाह) के बारे में रो-रो कर बता रहा हो।

शीर्षक: तोहफ़ा-तुल-अवाम: वह किताब जिसने सैकड़ों साल पहले सिखाया "अल्लाह कैसे मिलते हैं"

यह कोई साधारण कहानियों की किताब नहीं है। यह की किताब है। इसे 18वीं शताब्दी (लगभग 1740-50 के आसपास) में एक महान सूफी संत, कवि और विद्वान शाह निज़ामुद्दीन औलिया (औरंगाबादी) ने लिखा था। हाँ, दिल्ली वाले हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया से इन्हें भ्रमित न करें – ये उन्हीं के नाम पर एक और बुज़ुर्ग थे, जिनका उर्स (वार्षिक मेला) औरंगाबाद, महाराष्ट्र में लगता है। क्यों लिखी गई यह किताब? शाह निज़ामुद्दीन औलिया (औरंगाबादी) एक बहुत बड़े आशिक़-ए-हक़ीक़ी (सच्चे प्रेमी) थे। उनकी जुबान पर हमेशा ये ज़िक्र रहता था कि इंसान की रूह (आत्मा) अल्लाह से बिछड़ कर इस दुनिया में आई है और उसे वापस अपने मूल स्रोत में मिल जाना है।